अमेरिका ने बंद किया प्रोजेक्ट फ्रीडम, क्या होर्मुज स्ट्रेट पर अब नहीं अटकेंगे शिप?

अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालने के लिए शुरू किया गया प्रोजेक्ट फ्रीडम रोक दिया है. ट्रंप ने इसे ईरान के साथ बातचीत में हुई प्रगति का नतीजा बताया है. आइए जानें क्या अब जहाज नहीं फंसेंगे.

अमेरिका ने बंद किया प्रोजेक्ट फ्रीडम, क्या होर्मुज स्ट्रेट पर अब नहीं अटकेंगे शिप?

मिडिल ईस्ट के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मचे कोहराम के बीच अमेरिका ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. कल तक ईरान को मिटाने की चेतावनी देने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक अपने महत्वाकांक्षी मिशन 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को रोकने का ऐलान कर दिया है. यह वही ऑपरेशन था, जिसे दुनिया भर के फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस को खत्म करने के लिए बड़े दावों के साथ शुरू किया गया था. ट्रंप का यह कदम क्या वाकई शांति की पहल है या फिर समंदर में छिपे किसी बड़े खतरे का संकेत?

तीन दिन के भीतर समेटा गया बड़ा मिशन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को बड़े तामझाम के साथ शुरू किया था, उसे महज तीन दिनों के भीतर ही समेटने की घोषणा कर दी गई है. इस मिशन का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे तेल और गैस के टैंकरों को ईरानी प्रभाव से मुक्त कराकर सुरक्षित गलियारा देना था. लेकिन अचानक व्हाइट हाउस से आए इस फैसले ने सभी को सोच में डाल दिया है. इसके साथ ही पिछले 66 दिनों से चल रहे सैन्य ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' को भी खत्म करने का ऐलान किया गया है, जो सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य आक्रामकता का हिस्सा था.

बातचीत के रास्ते और 'बड़ी प्रगति' का दावा

6 मई 2026 को दिए गए बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया है कि ईरान के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी प्रगति हुई है. ट्रंप के मुताबिक, पाकिस्तान और कुछ अन्य मित्र देशों के विशेष अनुरोध पर यह कदम उठाया गया है, ताकि युद्ध जैसी स्थिति को टालकर बातचीत को एक सार्थक मौका दिया जा सके. अमेरिका का मानना है कि सैन्य बल के बजाय अब मेज पर बैठकर मसले सुलझाए जा सकते हैं, यही वजह है कि उन्होंने फिलहाल प्रोजेक्ट फ्रीडम पर ब्रेक लगा दिया है.

क्या अब होर्मुज में सुरक्षित रहेंगे व्यापारिक जहाज?

इस खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब शिप नहीं अटकेंगे? हकीकत यह है कि प्रोजेक्ट फ्रीडम के रुकने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रास्ता पूरी तरह सुरक्षित हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम अभी कम नहीं हुआ है. ईरान ने जहाजों के गुजरने के लिए प्री-क्लियरेंस यानी पूर्व अनुमति के नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं. जब तक ईरान और अमेरिका के बीच कोई औपचारिक और लिखित शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक किसी भी व्यापारिक जहाज के लिए वहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं है.

खत्म नहीं हुई है अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी

भले ही अमेरिका ने बचाव अभियान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को अस्थायी रूप से रोक दिया हो, लेकिन उसने अपनी सैन्य पकड़ ढीली नहीं की है. अमेरिकी नौसेना की ईरानी बंदरगाहों के पास सख्त नाकेबंदी अभी भी जारी है. अमेरिका का कहना है कि वह निगरानी रखेगा कि ईरान अपनी गतिविधियों को सीमित करता है या नहीं. दूसरी ओर, ईरान ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसेना का उसके समुद्री क्षेत्र के पास मौजूद रहना युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा. यानी समंदर में बारूद की गंध अभी भी मौजूद है.

शिपिंग कंपनियों की चिंता और वैश्विक बाजार का हाल

दुनिया भर की बड़ी शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं. ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का लगभग 25% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. प्रोजेक्ट फ्रीडम पर ब्रेक लगने के बाद कंपनियां इस बात का आकलन कर रही हैं कि क्या उनके चालक दल और करोड़ों डॉलर के माल सुरक्षित रहेंगे. चूंकि कोई आधिकारिक संधि नहीं हुई है, इसलिए जहाजों के फंसने या ईरान द्वारा उन्हें कब्जे में लेने का डर अभी भी बना हुआ है. जब तक तनाव शून्य नहीं होता, तब तक समुद्री बीमा की दरें आसमान पर ही रहेंगी.